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गोबर के ढेर से निकले जीवित नवजात बच्ची

जाको राखे साईंया मार सके न कोय

कौशाम्बी। कोखराज थाना क्षेत्र के बालकमऊ गांव में रविवार को ‘जाको राखे साईंया मार सके न कोय’ वाली कहावत सच साबित हुई। दरअसल किसी अज्ञात प्रसूता मां ने लोकलाज के भय से अपनी नवजात बच्ची को गोबर के ढेर में दबा मौत के हवाले कर दिया। लेकिन बच्ची के रोने की आवाज़ सुन महिलाओं ने उसे ढेर में दबी नवजात को जीवित निकाला। बच्ची जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही थी। गांव की एक महिला ने उसका इलाज कराकर उसे अपना बना लिया। बच्ची अब महिला के हाथों में सुरक्षित है।

बालकमऊ गांव में दोपहर कुछ महिलाएं गांव के खलिहान में बैठी थी। तभी उन्हें बच्चे की रोने की आवाज़ सुनाई पड़ी। महिलाओं ने आसपास देखा लेकिन कोई भी वहां बच्चा नहीं दिखा। रोने की आवाज़ की तरफ महिलाएं पहुंची तो उन्हें गोबर से ढेर से आवाज़ सुनाई दी। गोबर के ढेर से बच्चे की आवाज़ आने की जानकारी मिलते ही लोगों का मजमा लग गया।

ग्रामीण पुरुषों ने ढेर को हटाना शुरू किया आवाज़ तेज हो गई। कुछ ही पलों में ढेर से एक बच्ची दिखाई पड़ी। जो मौत से बचने के लिए जिंदगी की गुहार रोकर लगा रही थी। बच्ची को बाहर निकालकर उसे नजदीकी चिकित्सक के पास ले जाया गया। जहां स्थानीय चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद स्वस्थ होने की बात कही। ग्रामीणों ने स्थानीय थाना पुलिस को बच्ची के मिलने सूचना दी लेकिन देर शाम पर कोई पुलिस कर्मी गांव नहीं पहुंच सका। गांव की एक महिला ने उसे ईश्वर का प्रसाद समझ अपनी ममता का आंचल उसे दिया। बच्ची महिला के पास सुरक्षित है।

ग्रामीण बोले-जाको राखे सईंया मार सके न कोय

रविवार को गोबर के ढेर की कब्र में दबाई गई, बच्ची करीब 3 घण्टे से अधिक समय तक दबी होने की आशंका ग्रामीणों ने जताई है। बावजूद इसके वह चमत्कारिक रूप से जीवित निकली। ग्रामीण इसे ईश्वरीय चमत्कार मान रहे है। महिला शीला ने बताया, उसकी कोई औलाद नहीं है। वह रोज भगवान से बच्चे की दुवा मांगती थी। आज भगवान से उसे बच्ची देकर उसकी सुनी गोद भर दी है।

लोकलाज के भय से नवजात को गोबर से ढेर में दबाये जाने की चर्चा

बालकमऊ गांव में नवजात के मिलने के बाद गांव के चर्चा आम हो गई है कि किसी अज्ञात मां ने प्रसव के बाद लोक लज्जा से बचने के लिए जीवित बच्ची को मौत का यह खौफनाक कृत्य किया था। लेकिन निष्ठुर नियति को बच्ची की हालत पर तरस आ गया। नवजात की आवाज़ महिलाओं के कान तक पहुंची और अब वह इस दुनिया में जीवित हालत में एक मां के आंचल में उसकी खुशियां बन गई है।

नहीं पहुंची पुलिस तो शीला ने नवजात को अपनाया

ग्रामीण महिला शीला ने बताया, स्थानीय लोगों ने फोन पर कोखराज पुलिस को बच्ची के मिलने की सूचना दी, लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुंचना जरुरी नहीं समझा। देर शाम तक कोई भी पुलिस कर्मी गांव नहीं पहुंचा था। ग्रामीणों से सलाह मसविरा कर शीला और उसके पति लवकुश ने उसे अपनी ममता की छांव दी। लवकुश व शीला का कहना है कि वह उसे दुनिया की सारी खुशियां देना चाहते हैं। बच्ची उसके घर दीपावली से पहले लक्ष्मी का रूप लेकिन उनके घर संसार में आई है।

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