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अलग – अलग खरीदे लक्ष्मी -गणेश की प्रतिमाएं , होगा शुभ

गणेश जी की सूंड मोदक या लड्डू की ओर मुड़ी हुई होना बहुत शुभ होता है

 

गोरखपुर। आज धनतेरस है। धनतेरस पर यदि गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदने जा रहे हैं तो कुछ बातों पर विशेष ध्यान दें। कई बार सही जानकारी न होने के कारण व्यक्ति ऐसी मूर्ति खरीदकर घर ले आते हैं, जिससे वास्तु दोष या अन्य प्रकार की परेशानियां खडी हो जाती हैं। गणेश व लक्ष्मी जी की मूर्ति अलग-अलग खरीदे। मुर्तिया अंदर से खोखली न हो व उनकी अधिकतम ऊंचाई 6 इंच से ज्यादा न हो ।

ज्योतिषाचार्य पंडित कपिल आचार्य ने धनत्रयोदशी तिथि पर किस मुहूर्त में पूजा करें, कैसी मूर्तियां खरीदे ,किस विधि से पूजा करे इसके बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि धनत्रयोदशी तिथि को महालक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुई थी। इस तिथि को कामेश्वरी जयंती के रुप में भी जाना जाता है। इस दिन को महालक्ष्मी की पूजा करने से उनका घर में स्थायी निवास होता है और सारी सुख संपदाएं अनावरत प्राप्त होती रहती है। धनत्रयोदशी का शुभारंभ मंगलवार प्रात: 8:45 से शुरु होकर बुधवार सुबह 7:15 तक रहेगा। व्यवसायी व उद्योगपति वर्ग के लिए यह पूजा अत्यंत शुभप्रद होती है।

ऐसी मूर्ति खरीदे-
आचार्य बताते है कि पूजा के लिए सदैव लक्ष्मी -गणेश जी अलग -अलग मूर्ति खरीदे क्योंकि गणेश व लक्ष्मी दोनों अलग देवी देवता है। दोनों का अलग -अलग सम्मान होना चाहिए। गणेश जी का सूढ उनके दायी तरफ रहना चाहिए। मूर्ति की अधिकतम ऊंचाई 6 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। मूर्ति खरीदते समय हमेशा गणेश जी के हाथ में मोदक होना जरूरी है। ऐसी मूर्ति सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह मोदक बाएं हाथ में होना अति शुभ होता है।यानी गणेश जी की सूंड मोदक या लड्डू की ओर मुड़ी हुई होना बहुत शुभ होता है।

पूजा का मुर्हूत –

पंडित कपिल आचार्य ने पूजा करने के स्थिर लग्न मुहूर्त व मध्यम मुहूर्त बताएं है।मां लक्ष्मी की पूजा के लिए स्थिर मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। पूजा करने के चार शुभ
स्थिर मुर्हूत मंगलवार प्रात: 8:40 से 9:32 वृश्चिक लग्न, दोपहर 1:22 से 2:43 कुंभ लग्न ,सांय 6 बजे से 7:57 वृष लग्न, रात्रि 12:28 से 2: 44 बजे तक हैं।

ऐसे करे गणेश-लक्ष्मी की पूजा-

सर्वप्रथम लक्ष्मी जी को पूजा स्थान पर दाहिने स्थान पर और गणेश जी को बायी तरफ रखे। लक्ष्मी जी को लाल आसन व गणेश जी को लिए पीले आसन पर विराज मान करें। साथ ही कुबेर जी के लिए लाल पोटली रख दे । कुछ धन उस पोटली में रख दे। तीनों को पुष्प अर्पित करें। तीन-तीन बार जल,एक बार पंचामृत ,जल,इत्र,चंदन,रोली घोलकर स्नान कराए। लाल वस्त्र समर्पित करे। फूल माला ,घी के अनेको दीपक जलाएं । फल ,अनेक पकवान चढ़ाएं। कमलगट्टा के बीज व मजीठ की लड़की समर्पित करे। पान का बीडा,दक्षिणा व गनेण को अर्घ्य दे। कपूर,घी,अगर-तगर,इत्र ,चंदन चूर्ण मिश्रित करके आरती करें। पांच या सात दीपक की आरती कर सकते है।

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