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बात तो चुभेगीवॉयस ऑफ शताब्दी

बोया पेड़ बबूल का आम कहां से खाय

बात तो चुभेगी

नरेश मिश्र
26 और 27 अक्टूबर भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। इस दिन जम्मू कश्मीर रियासत का भारतीय संघ में पूर्ण विलय हुआ था। पाकिस्तान के तथाकथित कायदेआजम ने अपनी फौज और कबाइलियों को जम्मू कश्मीर पर हमला करने के लिए भेज दिया था। इस टिड्डी दल को रियासत की फौज रोकने में नाकाम रही । रियासत के मुस्लिम फौजी कबाइलियों का मुकाबला करने के लिए भेजे गए । वे मुकाबला करने के बजाय गद्दारी कर गए और हमलावर कबाइलियों से मिल गए ।  सिर्फ मेजर सोमनाथ शर्मा ने बारामूला में हमलावरों को रोक रखा था । इस कठिन क्षण में  रियासत के महाराज हरि सिंह ने मदद के लिए भारत सरकार से गुहार लगाई । भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन्हें जवाब दिया कि जब तक वे अपनी रियासत का भारत संघ में विलय नहीं कर देते तब तक उनको मदद देना मुमकिन नहीं है ।

लाचार महाराज हरिसिंह ने बिना शर्त अपनी रियासत को भारत संघ में मिलाने का प्रस्ताव भेज दिया ।26 तारीख की रात महाराजा हरिसिंह ने अपनी बॉडीगार्ड से कहा, अगर सुबह होने तक भारतीय फौज श्रीनगर नहीं पहुंची तो मुझे सोते में गोली मार देना । मैं जीते जी पाकिस्तान की गुलामी की जंजीरों में जकड़ना नहीं चाहता । सुबह होते ही  श्रीनगर हवाई अड्डे पर भारतीय फौज पहुंच गई । सिख रेजिमेंट के जवानों ने कबाइलियों पर पलटवार शुरू कर दिया । जबरदस्त खूनी जंग शुरू हो गई । कबाइली वेष में आए पाकिस्तानी फौजी पीछे हटने लगे। इस बीच मेजर सोमनाथ शर्मा दुश्मन से लड़ते हुए शहीद हो गए । महबूबा मुफ्ती, फारुख अब्दुल्ला, उमरअब्दुल्ला गुलाम नबी आजाद को यह घटना याद नहीं आती । उन्हें भारत का यह गौरवशाली इतिहास भूल गया है। वे मिलजुलकर टी-20 विश्व कप में भारतीय टीम की हार का जश्न मनाने वालों की तरफदारी कर रहे हैं । खेल भावना से प्रेरित होकर अच्छा खेलने वाली टीम के लिए ताली बजाना जायज है लेकिन अपने मुल्क की मिट्टी में पाकिस्तानी झंडे लहराना और पाकिस्तान का राष्ट्रीय गीत गाना कहां तक जायज है । पाकिस्तान इस वक्त सिविल वार के मुहाने पर खड़ा है । अगले 48 घंटे में इस मुल्क का कुछ भी हो सकता है । कट्टरपंथी आंदोलनकारी इस्लामाबाद की तरफ बढ़ रहे हैं। अफगानिस्तान पाक बॉर्डर पर अलकायदा और आईएसआईएस के आतंकी तबाही मचा रहे हैं। कट्टर जिहादी आंदोलनकारियों की मांग है कि फ्रांस के राजदूत को मुल्क से निकाल दिया जाय । कट्टर मजहबी मौलाना साद को जेल से रिहा किया जाय ।

फ्रांस के राजदूत पर ईश निंदा की तोहमत मढ़ी जा रही है । अफगानिस्तान को मदद देने के लिए विदेशी मुल्क तैयार हो रहे हैं । एक कहावत याद आती है । इत ते वे पाहन हनत उत ते वे फल देत। इधर से वे पत्थर मारते हैं उधर से वे फल देते हैं । अमेरिकियों की पतलून ढीली हो रही है। उन्हें अलकायदा और आईएसआईएस का डर सता रहा है । वे डर के मारे तालिबान को और मदद देंगे । तालिबान का कोड़ा अमरीकियों की पीठ पर पड़ रहा है । लोकतंत्र लाचार है । तालिबान जोरदार है । पाकिस्तान के अफवाह मंत्री फवाद चौधरी फरमाते हैं । उनके मुल्क में जो बेचैनी फैल रही है उसके पीछे भारत का हाथ है । उन्हें अपने गुनाहों की याद नहीं आती । पड़ोसी पर ठीकरा फोड़ते हैं । जम्मू कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं को आंख खोलकर पाकिस्तान के हालात देखने चाहिए । धारा 370 और 35 ए की हटना नामुमकिन है । कोई भी दरिया उल्टी धारा में पहाड़ की ओर वापस नहीं लौटता । महबूबा मुप्ती और फारुख अब्दुल्ला को एक बार इस मसले पर ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए । वे दिन गए जब मियां खलील खां फाख्ते उड़ाया करते थे । केंद्र सरकार से मोटी रकम लो और उससे अपनाया शरमाया खड़ा करो । यह चाल अब नहीं चलने वाली ।

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